Janmashtami Vrat Kaise Rakhta hai; 
जन्माष्टमी का व्रत कैसे रखते हैं?



आज हम आपको बताने जा रहे हैं जन्माष्टमी व्रत की सही विधि क्या है ? 

कई श्रद्धालु इस व्रत को रखते हैं, 

लेकिन जन्माष्टमी व्रत कब से कब तक रखा जाता है लोग इसे लेकर हमेशा संशय में रहते हैं।

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कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम:-

  • जन्माष्टमी व्रत के नियम एक दिन पहले से शुरू हो जाते हैं।
  • जन्माष्टमी से एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को सात्विक भोजन करें और मन शांत रखें।
  • व्रती को पूरे दिन अपनी इच्छानुसार निर्जला या फलाहार उपवास रखना चाहिए।
  • इस दिन प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, तंबाकू इत्यादि चीजों का भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत वाले दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्री कृष्ण के समक्ष घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन अपना मन भगवान की भक्ति में लगाएं रखें।
  • इस व्रत में अन्न का सेवन बिल्कुल भी न करें। 
  • आप फलाहारी भोजन ले सकते हैं।
  • रात के समय भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और परिवार सहित उनकी आरती करें।
  • इसके बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांट दें।
  • जन्माष्टमी का व्रत अपने यहां की परंपरा के अनुसार उसी दिन रात 12 बजे के बाद या फिर अगले दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए।
  • इस दिन भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन जरूर करने चाहिए।

कृष्ण जन्माष्टमी की रात में व्रत कैसे खोलें :-

  • जन्माष्टमी की रात में व्रत खोलने से पहले भगवान कृष्ण की विधि विधान पूजा करें ।
  • उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाएं। 
  • इसके बाद पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद को खाकर अपना व्रत खोल लें।
  • रात की पूजा के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।


कृष्ण जन्माष्टमी व्रत पारण मुहूर्त:-

  • जो लोग जन्माष्टमी के दिन ही व्रत पारण करते हैं वो रात 12 बजे की पूजा के बाद अपना व्रत खोल सकते हैं।
  • वहीं जो अगले दिन व्रत खोलते हैं वो  सुबह सूर्योदय के बाद अपना उपवास खोल सकते हैं।